भूमि आंवला अथवा भुंई आमला अथवा भूआमलकी एरन्ड कुल का लगभग 1.5 फीट से 2 फीट ऊंचा एक वर्षीय पौधा होता है जो बरसात के समय खेतों में खरपतवार के रूप में स्वयंमेव उगता दिखाई देता है आजकल समस्त भारत में उगा हुआ है खूब भूमि आंवला में एंटीमाइक्रोबियल, हेपेटोप्रोटेक्टिव, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-कैंसर, एंटी-वायरल, एंटी-प्लास्मोडियल और मूत्रवर्धक जैसे विभिन्न चिकित्सीय प्रभाव होते हैं
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक में कहीं भी छाले हों मुंह से लेकर कोलोन तक ये सभी को पूर्णतः स्वस्थ करने की शक्ति रखता है
लीवर हमारे शरीर में ज्ञात 500 तरह से कार्य करता है
भूमि आंवला लिवर की बीमारियों के लिए सर्वोत्तम इलाज है। ये लिवर में हेपेटोप्रोटेक्टिव, एंटीऑक्सिडेंट और एंटीवायरल गतिविधियों के कारण होने वाले किसी भी नुकसान से बचाता भूमि आंवला लिवर में सूजन, पीलिया और कमजोर लिवर की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा ये लिवर के काम-काज को भी तेज करता है और डिटॉक्सीफिकेशन के प्रोसेस को तेज करता है। जिन लोगों को मतली या खाना न पचा पाने की परेशानी है या खाने के बाद दस्त आने की परेशानी होती है, उनके लिए भी ये बहुत फायदेमंद है।
किडनी की बीमारियों को दूर भगाने में भूमि आंवला बहुत फायदेमंद है। असल में ये डाइयूरेटिक (diuretic) गुणों से भरपूर है, जो कि पेशाब की परेशानी को दूर करते हैं और यूटीआई इंफेक्शन को भी दूर करते हैं। इसके अलावा ये शरीर से पानी और सोडियम को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं। ये हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में मदद करते हैं।
यह किडनी में ऑक्सालेट क्रिस्टल को जमा नहीं होने देता है। आयुर्वेद के अनुसार, भुई आंवला पित्त का संतुलन बनाए रखता है। जिससे अपच और एसिडिटी की समस्या नहीं होती है
इसलिए भूमि आंवला के सेवन से गुर्दे में पथरी होने का खतरा भी कम हो जाता है।
भूमि आंवला बालों को फिर से उगाने और कीमोथेरेपी के कारण होने वाले बालों के झड़ने को नियंत्रित करने में मदद करता है। भूमि आंवला को मौखिक रूप से देने से बालों के रोम छिद्रों को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है या बालों के रोम पर कीमोथेरेपी दवाओं के प्रभाव को रोकने के लिए दिया जा सकता है। यह पुरुष हार्मोन असंतुलन के कारण होने वाले मेल पैटर्न गंजेपन के उपचार में भी सहायक है।
भूमि आंवला में कैंसर कोशिका के विकास और वृद्धि को रोकने की प्रबल क्षमता होती है। यह त्वचा लीवर और आंतों के कैंसर पर चमत्कारिक प्रभाव डालता है और इसकी बहुलता और उपज को कम कर देता है।
भूमि आंवला के संयोजन से सामान्य कोशिकाओं पर कुछ साइटोप्रोटेक्टिव लाभ होते हैं और प्री-नियोप्लास्टिक या नियोप्लास्टिक कोशिकाओं पर साइटोटोक्सिक प्रभाव के परिणामस्वरूप कैंसर होता है । इसके अलावा, शक्तिशाली फाइटोकेमिकल्स, जैसे कि क्वेरसेटिन और रुटिन, त्वचा के पेपिलोमा के प्रसार में उल्लेखनीय कमी करते हैं तथा कार्सीनोमो को इसका जबरदस्त एल्कालाइजर व्यवहार समाप्ति की और ले जाता है
मैं ताजा स्वरस को प्राथमिकता देता हूं जड़ सहित जूस निकाल कर 20-30 मिलीलीटर सुबह
🔸भूमि आंवला का इस्तेमाल से होने वाले लाभ
- लीवर बढ़ गया है या उसमे सूजन है तो यह उसके लिए बहुत असरदार दवाई है।
- पीलिया में इसकी पत्तियों के पेस्ट को छाछ के साथ मिलाकर दिया जाता है इससे पीलिया बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
- किडनी के इन्फेक्शन और किडनी फेलियर में यह बहुत लाभदायक है। यह किडनी के सिस्टम को ठीक करती है। यह डाइयूरेटिक है जिससे यूरिन ज्यादा बनती है जिससे बॉडी की सफाई होती है।
- एन्टीवायरल गुण होने के कारण यह हेपेटाइटिस B और C के लिए रामबाण दवाई है।
- मुंह में छाले होने पर इसके पत्तों का रस चबाकर निगल लें या थूक दें। मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।
- ब्रेस्ट में सूजन या गांठ हो तो इसके पत्तों का पेस्ट लगा लेने से आराम होगा।
- सर्दी- खांसी में इसके साथ तुलसी के पत्ते मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से आराम मिलता है।
- डायबिटीज में घाव न भरते हों तो इसका पेस्ट पीसकर लगा दें और इसे काली मिर्च के साथ लिया जाए तो शुगर कंट्रोल हो जाती है।
🔸लिवर-किडनी से लेकर सर्दी-खांसी तक को खत्म कर देता है यह एक छोटा सा पौधा, बारिश में इधर-उधर अपने आप उग जाता है,
🔸भूमि आंवला एक आयुर्वेदिक दवाई है। इसके फल बिल्कुल आंवले जैसे दिखते हैं और यह बहुत छोटा पौधा होता है इसलिए इसे भुई आंवला या भूमि आंवला कहते हैं। यह बरसात में अपने आप उग जाता है और छायादार नमी वाले स्थानों पर पूरे साल मिलता है। इसे उखाड़ कर व छाया में सुखा यूज किया जाता है। ये जड़ी- बूटी की दुकान पर भी आसानी से मिल जाता है।
🔸कैसे यूज करें-
> इसके चूर्ण को आधा चम्मच पानी के साथ दिन में 2-3 बार
> पौधे का ताजा रस 10 से 20ML 2 से 3 बार
> ताजा पौधे को उखाड़ कर और साफ धोकर भी खाया जा सकता है।


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